शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

रहमतें यह लाता है (सर्वाधिकार सुरक्षित) Rehmaten yeh laata hai ( All rights reserved)

( इस कलाम-ए-रमज़ान को पढ़ने से ज़्यादा मज़ा सुनने में आएगा, इस लिंक पर :
http://www.box.net/shared/kzfzrpu9r3u008zkt2k0 )

रहमतें ये लाता है, बरकतें ये लाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

चार सू अल्लाह की रहमत बरसने लगती है
नूर से मामूर हो, हर शय चमकने लगती है
नेकियां बढ़ाता है, और बदी मिटाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

चल रहा है यह महीना पाकी-ओ-अज़मत भरा
वाह क्या कहने हैं इसके, नेमत-ओ-इबरत भरा
दूरियां मिटाता रब से, क़ुरबतें बढ़ाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

तेरा आगे हाथ फैलाता है ’शमसी’ ऐ ख़ुदा
अपनी रहमत के साए से इसको ना करना जुदा
यह हर साल आता है, यादें छोड़ जाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

रहमतें ये लाता है, बरकतें ये लाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है ।
---मुईन शमसी
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( To listen the following "kalaam-e-Ramzaan, visit:
http://www.box.net/shared/kzfzrpu9r3u008zkt2k0 )


REHMATEN YEH LAATAA HAI, BARKATEN YEH LAATAA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

CHAAR-SU ALLAAH KI REHMAT BARASNE LAGTI HAI
NOOR SE MAAMOOR HO HAR SHAY CHAMAKNE LAGTI HAI
NEKIYAAN BADHAATA HAI, AUR BADI MITAATA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

CHAL RAHAA HAI YEH MAHEENA PAAKI-O-AZMAT BHARAA
WAAH KYA KEHNE HAIN ISKE, NEMAT-O-IBRAT BHARAA
DOORIYAAN MITAATA RAB SE QURBATEN BADHATA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

TERE AAGE HAATH PHAILAATA HAI 'SHAMSI' AIY KHUDA
APNI REHMAT KE SAAYE SE ISKO NA KARNA JUDA
YEH HAR SAAL AATA HAI, YAADEN CHHOD JATA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

REHMATEN YEH LAATAA HAI, BARKATEN YEH LAATAA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI.
---Moin Shamsi

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