शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

HAR SHAY JUDAA-JUDAA (all rights are reserved.) हर शय जुदा-जुदा लगे (सर्वाधिकार सुरक्षित)

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HAR SHAY JUDAA-JUDAA LAGEY MAAHE SIYAAM ME,
PAANI ME BHI MAZAA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
BANDAA HO TANDURUST MAGAR ROZA NA RAKHEY,
ALLAH KO YE BURA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
HO DHOOP CHAANDNI YA SAMANDAR HAWAA SHAJAR,
SAB KUCHH NAYA-NAYA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
QAABU HAI KITNA NAFS PE HAR ROZADAAR KO,
DUNIYA KO YE PATAA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
MASJID NAMAAZIYON SE HAI ‘SHAMSI’ BHARI HUI,
MANZAR YE KHUSHNUMA LAGEY MAAHE SIYAAM ME।
---Moin Shamsi
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हर शय जुदा-जुदा लगे, माह-ए-सियाम में
पानी में भी मज़ा लगे, माह-ए-सियाम में

बन्दा हो तन्दरुस्त मगर रोज़ा ना रखे
अल्लाह को यह बुरा लगे, माह-ए-सियाम में

हो धूप, चांदनी या समन्दर, हवा, शजर
सब कुछ नया-नया लगे, माह-ए-सियाम में

क़ाबू है कितना नफ़्स पे हर रोज़ादार को
दुनिया को यह पता लगे, माह-ए-सियाम में

मस्जिद नमाज़ियों से है ’शमसी’ भरी हुई
मंज़र यह ख़ुशनुमा लगे, माह-ए-सियाम में ।
---मुईन शमसी

( इसे सुनना चाहें तो यहाँ तशरीफ लायें : http://www.box.net/shared/l22l5okg7dvbagdnst0z )

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