मंगलवार, 30 अगस्त 2011

Eid aa gayi (All rights are reserved) ईद आ गई (सर्वाधिकार सुरक्षित)

ख़ुश आज हर बशर है, सुनो, ईद आ गई
महताब पर नज़र है, सुनो, ईद आ गई

हर फ़र्द, ख़्वाह मर्द हो, औरत हो, तिफ़्ल हो
मसरूफ़ किस क़दर है, सुनो, ईद आ गई

मस्जिद में, घर में, चौक में, बाज़ार-ओ-राह में
रौनक़ यह रात भर है, सुनो, ईद आ गई

जो माह-भर रहा है परहिज़गार-ओ-मुत्तक़ी
उसको बड़ा अजर है, सुनो, ईद आ गई

डरता ख़ुदा के ख़ौफ़ से, करता है नेकियां
’शमसी’ तो बे-ख़तर है, सुनो, ईद आ गई ।
---मुईन शमसी

( इस कलाम-ए-ईद को सुनने के लिये इस लिंक पर तशरीफ़ ले जाइये :
http://www.box.net/shared/0ulve77l26d6nknjcux8 )
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Khush aaj har bashar hai, suno, Eid aa gayi
mahtaab par nazar hai, suno, Eid aa gayi

har fard, khwaah mard ho, aurat ho, tifl ho
masroof kis qadar hai, suno, Eid aa gayi

masjid me, ghar me, chauk me, baazaar-o-raah me
raunaq ye raat bhar hai, suno, Eid aa gayi

jo maah-bhar rahaa hai parhizgaar-o-muttaqi
usko bada ajar hai, suno, Eid aa gayi

darta khuda ke khauf se, karta hai nekiyaan
'shamsi' to be-khatar hai, suno, Eid aa gayi.
---Moin Shamsi

( To hear this Kalaam-e-Eid, visit :
http://www.box.net/shared/0ulve77l26d6nknjcux8 )

सोमवार, 29 अगस्त 2011

Alvida maah-e-mubaarak (All rights are reserved) अलविदा माह-ए-मुबारक (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Alvida maah-e-mubaarak, tujh ko kehte alvida
phir milenge tujh se gar chaha khuda ne, alvida

tu jo aya sang laya nematen aur barkaten
ja raha hai chhod kar tu yad apni, alvida

theen tere dam se har ik momin ke ghar me raunaqen
masjido me rozadaaro ki thi mehfil, alvida

farzo sunnat aur nawafil, sab ki theen pabandiyan
sehri-o-aftar ka dilkash nazara, alvida

hai dua 'shamsi' ki, ya Rab ! josh ye qaayam rahe
deen ke taabe rahen ham baaraho maah, alvida.
---Moin Shamsi

( To hear this kalaam, visit: http://www.box.net/shared/94qqa1s8r4kfcra4genj )
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अलविदा माह-ए-मुबारक, तुझको कहते अलविदा
फिर मिलेंगे तुझ से गर चाहा ख़ुदा ने, अलविदा

तू जो आया संग लाया नेमतें और बरकतें
जा रहा है छोड़ कर तू याद अपनी, अलविदा

थीं तेरे दम से हर इक मोमिन के घर में रौनक़ें
मस्जिदों में रोज़ादारों की थी महफ़िल, अलविदा

फ़र्ज़ो-सुन्नत और नवाफ़िल, सब की थीं पाबन्दियां
सहरी और अफ़्तार का दिलकश नज़ारा, अलविदा

है दुआ ’शमसी’ की, या रब ! जोश ये क़ायम रहे
दीन के ताबे रहें हम बारहों माह, अलविदा ।
---मुईन शमसी

( इस कलाम को सुनने के लिये इस लिंक पर तशरीफ़ ले जाएं :
http://www.box.net/shared/94qqa1s8r4kfcra4genj )

शनिवार, 20 अगस्त 2011

यह कैसी आज़ादी (सर्वाधिकार सुरक्षित)

कहने को आज़ाद हैं हम, पर यह कैसी आज़ादी है
चरम पे भ्रष्टाचार है पहुंचा, हिंसा है, बर्बादी है

जनसाधारण की ख़ातिर जो बुनी कभी थी गांधी ने
महंगी होकर धनिकों के तन पर वो सजती खादी है

सींचा था जिस चमन को हिंदू-मुस्लिम ने अपने ख़ूं से
द्वेष के सौदागरों ने उसमें ज़हर की बेल उगा दी है

बात-बात पे लाइन है लगती, या धक्का-मुक्की होती
जहां भी देखो वहां भीड़ है, सवा अरब आबादी है

क्या कारण है, क्यों वो हमको सदा छेड़ता रहता है
पैंसठ और इकहत्तर में जिसको औक़ात बता दी है

लक्ष्मी, लता, रज़िया, इन्दिरा और सरोजिनी के भारत में
गर्भ में कन्या मारी जाती, यह हरकत जल्लादी है

नोन-तेल-लकड़ी की क़ीमत ’शमसी’ बढ़ती ही जाती
कमर-तोड़ महंगाई ने सच कहूं क़यामत ढा दी है ।
---मुईन शमसी

Dekho phir azaan hui (All rights are reserved) (Parody of TERE JAISA YAR KAHAN) देखो फिर अज़ान हुई (सर्वाधिकार सुरक्षित)

( Audio of this "kalaam-e-azaan" is available at the following link:

http://www.esnips.com/doc/79ad5af5-7fee-48a5-bb59-d1d6a54db0e0/004-dhekho-phir )


Dekho phir azaan hui, Rab ne phir bulaya hai
momino chalo masjid, waqt-e-namaaz aya hai

sab kaam chhod kar tum, pehle namaaz padh lo
hai farz ye sabhi pe, isko ada to karlo
ahkaam-e-ibaadat to, Qur'aaN leke aya hai
momino chalo masjid, waqt-e-namaaz aya hai

padhte na jo namaazeN, wo soch leN zara to
denge ba-roz-e-mehshar, wo jawab kya khuda ko
sar pe har namazi ke, rehmatoN ka saya hai
momino chalo masjid, waqt-e-namaaz aya hai

dekho phir azaan hui, Rab ne phir bulaya hai
momino chalo masjid, waqt-e-namaaz aya hai.
---Moin Shamsi
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( इस ""कलाम-ए-अज़ान" को इस लिंक पर सुना जा सकता है:
http://www.esnips.com/doc/79ad5af5-7fee-48a5-bb59-d1d6a54db0e0/004-dhekho-phir )


देखो फिर अज़ान हुई, रब ने फिर बुलाया है
मोमिनो चलो मस्जिद, वक़्त-ए-नमाज़ आया है

सब काम छोड़कर तुम, पहले नमाज़ पढ़ लो
है फ़र्ज़ ये सभी पे, इसको अदा तो कर लो
अहकाम-ए-इबादत तो, क़ुर-आं ले के आया है
मोमिनो चलो मस्जिद, वक़्त-ए-नमाज़ आया है

पढ़ते न जो नमाज़ें, वो सोच लें ज़रा तो,
देंगे ब-रोज़-ए-महशर, वो जवाब क्या ख़ुदा को
सर पे हर नमाज़ी के, रहमतों का साया है
मोमिनो चलो मस्जिद, वक़्त-ए-नमाज़ आया है

देखो फिर अज़ान हुई, रब ने फिर बुलाया है
मोमिनो चलो मस्जिद, वक़्त-ए-नमाज़ आया है ।
---मुईन शमसी

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

मुहम्मद(स.) के दर पे (सर्वाधिकार सुरक्षित) Muhammad(SAWS) ke dar pe (All rights are reserved)

(तर्ज़ : सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं)

मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे
वहां जा के अब चैन हम पाएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे

वो दर है ऐसा जहां जा के हम को
मिलेंगी ख़ुशियां भुला देंगे ग़म को
दर-ए-अक़दस की जो जाली है चूम कर आएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे

दर-ए-मुहम्मद(स.) से कोई सवाली
न लौटा अब तक लिये हाथ ख़ाली
मुरादें दिल में हमारे जो हैं वो हम पाएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे

कि लौट कर आएंगे जब वहां से
दिल में होंगी मदीने की यादें
उन्हीं यादों के सहारे ये ज़िन्दगी बिताएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे ।
---मुईन शमसी

( इस कलाम को इस लिंक पर विद म्यूज़िक सुना जा सकता है :
http://www.esnips.com/doc/ef9567d7-cc27-491d-8514-de879812de39/005-muhammad-ke )

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(Tarz : Suhana safar aur ye mausam haseeN)


Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge
wahaaN jaa ke ab chain ham paaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge

wo dar hai aisa jahaaN jaa ke ham ko
milengi khushiyaaN bhula denge gham ko
dar-e-aqdas ki jo jaali hai choom kar aaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge

dar-e-Muhammad(SAWS) se koi sawali
na lauta ab tak liye haath khaali
muraadeN dil meN hamaare jo haiN wo ham paaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge

ki laut kar aaenge jab wahaaN se
dil meN hongi madeene ki yaadeN
unheeN yaadoN ke sahaare ye zindagi bitaaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge.
---MOIN SHAMSI

[ Audio (with music) of this kalaam is available at the following link :
http://www.esnips.com/doc/ef9567d7-cc27-491d-8514-de879812de39/005-muhammad-ke ]

मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.) (सर्वाधिकार सुरक्षित) Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS) (all rights are reserved)

( http://www.box.net/shared/lztmhr77yst0l1q2yz9v )

( इस कलाम को सुनने के लिये ऊपर दिये गए लिंक को कॉपी-पेस्ट करें )


मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.), मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.)
मेरे दिल में है बस, मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.)

न ज़र की ज़रूरत, न शोहरत की चाहत
मुझे चाहिये बस, मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.)

बला दूर होगी, वबा दूर होगी
जो कसरत से पढ़ लो, मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.)

मेरी आरज़ू है, मदीना मदीना
मेरी जुस्तजू है मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.)

है ख़्वाबों में ’शमसी’ के, रौज़ा-ए-अतहर
बुलाएंगे इक दिन, मुहम्मद(स.) मुहम्मद(स.) ।
---मुईन शमसी

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Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS), Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS)
mere dil me hai bas, Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS)

na zar ki zaroorat, na shohrat ki chaahat
mujhe chaahiye bas, Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS)

balaa door hogi, wabaa door hogi
jo kasrat se padh lo, Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS)

meri aarzu hai, madeena madeena
meri justju hai, Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS)

hai khwaabo me 'shamsi' ke, rauza-e-at-har
bulayenge ik din, Muhammad(SAWS) Muhammad(SAWS).
---MOIN SHAMSI

( To hear this kalaam, copy-paste this link :
http://www.box.net/shared/lztmhr77yst0l1q2yz9v )

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

Dua : Tu kareem hai (All rights are reserved.) दुआ : तू करीम है (सर्वाधिकार सुरक्षित)

तू करीम है तो करम ये कर, मेरी ज़िंदगी तू संवार दे
जो ख़िज़ां के साए से दूर हो, मुझे ला-ज़वाल बहार दे

रहूं जब तलक मैं जहान में, शब-ओ-रोज़ तेरा ही नाम लूं
कि जहां से जाऊं मैं जब गुज़र, मेरी रूह को तू क़रार दे

है गिरा हुआ सजदे में ये बशर, करे तुझसे एक ही इल्तिजा
हो तेरा करम तो ये ज़िंदगी, यूं ही नेकियों में गुज़ार दे

मेरे दिल में तेरा ही ख़ौफ़ है, मैं तो राह-ए-हक़ पे हूं गामज़न
न रुकेंगे अब मेरे ये क़दम, कोई दर्द मुझको हज़ार दे

हो कभी जो ज़रूरत जान की, तो जुनून दिल में वो भर मेरे
कि ’मुईन’ अपनी ये जान भी, तेरे नाम पे ही निसार दे ।
---मुईन शमसी

( इस दुआ को मेरी आवाज़ में सुनने के लिये इस लिंक पर तशरीफ़ ले जाएं :
http://www.box.net/shared/eoxob0qkxq5ysbqziuyi )

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Tu kareem hai to karam ye kar, meri zindgi tu sanwaar de
jo khizaaN ke saaye se door ho, mujhe laa-zawaal bahaar de

rahu jab talak mai jahaan me, shab-o-roz tera hi naam lu
ki jahaaN se jaau mai jab guzar, meri rooh ko tu qaraar de

hai gira hua sajde me ye bashar, kare tujhse ek hi iltija
ho tera karam to ye zindgi, yu hi nekiyo me guzaar de

mere dil me tera hi khauf hai, mai to raah-e-haq pe hu gaamzan
na rukenge ab mere ye qadam, koi dard mujhko hazaar de

ho kabhi jo zaroorat jaan ki, to junoon dil me wo bhar mere
ki 'Moin' apni ye jaan bhi, tere naam pe hi nisaar de.
---Moin Shamsi

( To hear this dua in my voice, visit the following link:
http://www.box.net/shared/eoxob0qkxq5ysbqziuyi )

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

ऐ मोमिनो (सर्वाधिकार सुरक्षित) Aiy momino (all rights are reserved.)

Aiy momino dil me rakho chaahat rasool (SAWS) ki
jannat me le ke jayegi ulfat rasool (SAWS) ki

jeene ki naa ho fikr na marne ka khauf ho
mil jaye jab kisi ko inayat rasool (SAWS) ki

Allah aise logo ki qismat ka kya bayaaN
milti thi jinko roz hi qurbat rasool (SAWS) ki

aayen balaa se mushkilen, ho zindgi muhaal
karte rahenge ham to itaa'at rasool (SAWS) ki

hogi baroz-e-hashr yeh khwaahish 'Moin' ki
mil jaye mujh ko aaj zamaanat rasool (SAWS) ki.
---Moin Shamsi

( To hear this kalaam in my voice, copy-paste the following link:
http://www.box.net/shared/jd5uzmdx5ku4xr6vz9lp )

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ऐ मोमिनो दिल में रखो चाहत रसूल (स.) की
जन्नत में ले के जाएगी उल्फ़त रसूल (स.) की

जीने की ना हो फ़िक्र, ना मरने का ख़ौफ़ हो
मिल जाए जब किसी को इनायत रसूल (स.) की

अल्लाह ऐसे लोगों की क़िस्मत का क्या बयां
मिलती थी जिनको रोज़ ही क़ुर्बत रसूल (स.) की

आएं बला से मुश्किलें, हो ज़िन्दगी मुहाल
करते रहेंगे हम तो इताअत रसूल (स.) की

होगी बरोज़-ए-हश्र यह ख़्वाहिश ’मुईन’ की
मिल जए मुझको आज ज़मानत रसूल (स.) की ।
---मुईन शमसी

( मेरे इस कलाम को मेरी आवाज़ में सुनने के लिये इस लिंक को कॉपी-पेस्ट करें:
http://www.box.net/shared/jd5uzmdx5ku4xr6vz9lp )

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

दुआ : ये जहां तू ने ( सर्वाधिकार सुरक्षित) Dua : YE JAHAAn TOO NE (all rights are reserved)

( मेरी इस दुआ को मेरी आवाज़ में सुनने के लिये इस लिंक को कॉपी-पेस्ट करें :
http://www.box.net/shared/rry4rh9x4fvmco7nfvpp )


ये जहां तू ने बनाया, ’कुन’ के इक फ़रमान से
ख़ुल्द को तू ने सजाया, हूर से, ग़िल्मान से

हो रज़ा जिनमें तेरी, हम काम वो हर दम करें
दूर ना हों हम, ख़ुदाया ! दीन से, क़ुरआन से

जब तलक दुनिया में हैं, हम नेकियां करते रहें
या ख़ुदा ! हम को बचा तू, पंजा-ए-शैतान से

सारी दुनिया में अमन हो, चैन हो, आराम हो
नफ़रतें, या रब ! मिटा दे, हर दिल-ए-इंसान से

हर गुनाह ’शमसी’ का, या रब ! माफ़ कर ! अहसान कर !
ग़लतियां होती ही हैं, हर बंदा-ए-नादान से ।
---मुईन शमसी
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( To listen this Dua in my voice, copy-paste this link :
http://www.box.net/shared/rry4rh9x4fvmco7nfvpp )


YE JAHAAn TOO NE BANAAYA, 'KUN' KE IK FARMAAN SE
KHULD KO TOONE SAJAAYAA, HOOR SE, GHILMAAN SE
,

HO RAZAA JINME TERI, HAM KAAM WO HARDAM KAREN
DOOR NA HOn HAM, KHUDAYA ! DEEN SE, QUR'AAN SE


JAB TALAK DUNIYA ME HAIN, HAM NEKIYAAN KARTE RAHEN
YAA KHUDA ! HAMKO BACHA TU, PANJA-E-SHAITAAN SE


SAARI DUNIYA ME AMAN HO, CHAIN HO, AARAAM HO
NAFRATEN YAA RAB ! MITA DE, HAR DIL-E-INSAAN SE


HAR GUNAH 'SHAMSI' KA YA RAB ! MAAF KAR ! AHSAAN KAR !
GHALTIYAAN HOTI HI HAIN, HAR BANDA-E-NAADAAN SE.
---Moin Shamsi

सोमवार, 8 अगस्त 2011

रमज़ां का महीना है (सर्वाधिकार सुरक्षित) RAMZAAn KA MAHEENA HAI ( All rights are reserved)

( यह "कलाम-ए-रमज़ान" इस लिंक पर सुना भी जा सकता है : http://www.box.net/shared/i9lgzodaylaa58ioqhqk )


रमज़ां का महीना है, शान इसकी निराली है
इस महीने में भर जाती, हर वो झोली, जो ख़ाली है
रमज़ां का महीना है.....

मस्जिद में सभी मोमिन, मशग़ूल-ए-इबादत हैं
कुछ सजदे में हैं, तो कुछ, कर रहे तिलावत हैं
दरबार-ए-इलाही में, हर बन्दा सवाली है
इस महीने में भर जाती, हर वो झोली, जो ख़ाली है
रमज़ां का महीना है.....

हर मोमिन के घर में, अल्लाह की रहमत है
हर शय में हुई अब तो, बरकत ही बरकत है
हर छोटे-बड़े ने लौ, अल्लाह से लगा ली है
इस महीने में भर जाती, हर वो झोली, जो ख़ाली है
रमज़ां का महीना है.....

बाज़ारों भी देखो, रौनक़ बड़ी छाई है
करने को ख़रीदारी, ख़लक़त चली आई है
ताजिरों ने भी अपनी, दूकान सजा ली है
इस महीने में भर जाती, हर वो झोली, जो ख़ाली है
रमज़ां का महीना है..... ।
(---मुईन शमसी)
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( The following 'KALAAM-E-RAMZAAN' is available in audio-form with music on this link:
http://www.box.net/shared/i9lgzodaylaa58ioqhqk )


RAMZAAn KA MAHEENA HAI, SHAAN ISKI NIRAALI HAI
IS MAHEENE ME BHAR JAATI, HAR WO JHOLI, JO KHAALI HAI
RAMZAAn KA MAHEENA HAI.....

MASJID ME SABHI MOMIN, MASHGHOOL-E-IBAADAT HAIN
KUCHH SAJDE ME HAIN, TO KUCHH, KAR RAHE TILAAWAT HAIN
DARBAAR-E-ILAAHI ME, HAR BANDAA SAWAALI HAI
IS MAHEENE ME BHAR JAATI, HAR WO JHOLI, JO KHAALI HAI
RAMZAAn KA MAHEENA HAI.....

HAR MOMIN KE GHAR ME, ALLAH KI REHMAT HAI
HAR SHAY ME HUI AB TO, BARKAT HI BARKAT HAI
HAR CHHOTE-BADEY NE LAU, ALLAAH SE LAGA LI HAI
IS MAHEENE ME BHAR JAATI, HAR WO JHOLI, JO KHAALI HAI
RAMZAAn KA MAHEENA HAI.....

BAAZAARO ME BHI DEKHO, RAUNAQ BADI CHHAAI HAI
KARNE KO KHARIDAARI, KHALQAT CHALI AAI HAI
TAAJIRO NE BHI APNI, DOOKAAN SAJA LI HAI
IS MAHEENE ME BHAR JAATI, HAR WO JHOLI, JO KHAALI HAI
RAMZAAn KA MAHEENA HAI.....
(---moin shamsi)

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

Dil Me Khushi Hai (All Rights Reserved) दिल में ख़ुशी है (सर्वाधिकार सुरक्षित)

( If you want to listen this "Kalaam-e-Ramzaan" in my voice with music, visit :
http://www.esnips.com/doc/7e068026-bf4e-4186-b67c-f19f5f097696/003-dil-main-khushi )


DIL ME KHUSHI HAI, UMANGEN JAGI HAIN, RAMZAAN PHIR AA GAYAA
IK MAAH KI QAID ME, DEKH LO TUM, SHAITAAN PHIR AA GAYAA

RAMZAAN KA CHAAND JISNE BHI DEKHA, USNE YAH HANS KAR KAHAA
SABKO MUBAARAK HO MAAH-E-MUQADDAS, MAAH-E-KARAM AA GAYAA
ROZEY RAKHENGE NAMAAZEN PADHENGE, SAJDON ME GIR-GIR KE HAM
TAUBAA GUNAAHON SE APNE KARENGE, ALLAH KAREGAA RAHAM

GAR SACHCHE DIL SE, GUNAAHON SE TAUBA, KARTA HAI MOMIN KOI
USKE GUNAH MAAF HO JAATE HAIN, GAR, MARZI-E-MAULA HUI
HO JATA HAI PAAK WO IS TARAH SE, JAISE KI PAIDA HUA
HAAN BAAT YAH BHI HAI AAINDA PHIR WO, KOI KARE NA GUNAAH

QUR-AAN NE JO, BATAAYA HAI RASTA, USPE SABHI HAM CHALEN
HAQ HAM NA MAAREN KABHI BHI KISI KA, EEMAAN PE QAAYAM RAHEN
CHOOTON SE SHAFQAT, BUZURGON KI IZZAT, KARTE RAHEN HAM SADAA
HIFZ-O-AMAAN ME RAKHE RAB SABHI KO, AAO YE KAR LEN DUA
AAO YE KAR LEN DUA, AAO YE KAR LEN DUA , AAO YE KAR LEN DUA.
---Moin Shamsi


( मेरे इस "कलाम-ए-रमज़ान" को अगर मेरी आवाज़ और किशोर कुमार के अन्दाज़ में विद म्यूज़िक सुनना चाहें, तो इस लिंक पर तशरीफ़ लाए :
http://www.esnips.com/doc/7e068026-bf4e-4186-b67c-f19f5f097696/003-dil-main-khushi )

दिल में ख़ुशी है, उमंगें जगी हैं, रमज़ान फिर आ गया
इक माह की क़ैद में देख लो तुम, शैतान फिर आ गया
रमज़ान का चांद जिसने भी देखा, उसने यह हंस कर कहा
सबको मुबारक हो माह-ए-नुक़द्दस, माह-ए-करम आ गया
रोज़े रखेंगे, नमाज़ें पढ़ेंगे, सजदों में गिर-गिर के हम
तौबा गुनाहों से अपने करेंगे, अल्लाह करेगा रहम

गर सच्चे दिल से, गुनाहों से तौबा, करता है मोमिन कोई
उसके गुनाह माफ़ हो जाते हैं, गर, मर्ज़ी-ए-मौला हुई
हो जाता है पाक वो इस तरह से, जैसे कि पैदा हुआ
हां बात यह भी है आइंदा फिर वो, कोई करे ना गुनाह

क़ुरआन ने जो, बताया है रस्ता, उस पे सभी हम चलें
हक़ हम न मारें कभी भी किसी का, ईमां पे क़ायम रहें
छोटों से शफ़क़त, बुज़ुर्गों की इज़्ज़त, करते रहें हम सदा
हिफ़्ज़ो-अमां में रखे रब सभी को, आओ यह कर लें दुआ
आओ यह कर लें दुआ, आओ यह कर लें दुआ, आओ यह कर लें दुआ ।
---मुईन शमसी

HAR SHAY JUDAA-JUDAA (all rights are reserved.) हर शय जुदा-जुदा लगे (सर्वाधिकार सुरक्षित)

( To listen this KALAAM-E-RAMZAAN, kindly visit: http://www.box.net/shared/l22l5okg7dvbagdnst0z )


HAR SHAY JUDAA-JUDAA LAGEY MAAHE SIYAAM ME,
PAANI ME BHI MAZAA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
BANDAA HO TANDURUST MAGAR ROZA NA RAKHEY,
ALLAH KO YE BURA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
HO DHOOP CHAANDNI YA SAMANDAR HAWAA SHAJAR,
SAB KUCHH NAYA-NAYA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
QAABU HAI KITNA NAFS PE HAR ROZADAAR KO,
DUNIYA KO YE PATAA LAGEY MAAHE SIYAAM ME.
MASJID NAMAAZIYON SE HAI ‘SHAMSI’ BHARI HUI,
MANZAR YE KHUSHNUMA LAGEY MAAHE SIYAAM ME।
---Moin Shamsi
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हर शय जुदा-जुदा लगे, माह-ए-सियाम में
पानी में भी मज़ा लगे, माह-ए-सियाम में

बन्दा हो तन्दरुस्त मगर रोज़ा ना रखे
अल्लाह को यह बुरा लगे, माह-ए-सियाम में

हो धूप, चांदनी या समन्दर, हवा, शजर
सब कुछ नया-नया लगे, माह-ए-सियाम में

क़ाबू है कितना नफ़्स पे हर रोज़ादार को
दुनिया को यह पता लगे, माह-ए-सियाम में

मस्जिद नमाज़ियों से है ’शमसी’ भरी हुई
मंज़र यह ख़ुशनुमा लगे, माह-ए-सियाम में ।
---मुईन शमसी

( इसे सुनना चाहें तो यहाँ तशरीफ लायें : http://www.box.net/shared/l22l5okg7dvbagdnst0z )

रहमतें यह लाता है (सर्वाधिकार सुरक्षित) Rehmaten yeh laata hai ( All rights reserved)

( इस कलाम-ए-रमज़ान को पढ़ने से ज़्यादा मज़ा सुनने में आएगा, इस लिंक पर :
http://www.box.net/shared/kzfzrpu9r3u008zkt2k0 )

रहमतें ये लाता है, बरकतें ये लाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

चार सू अल्लाह की रहमत बरसने लगती है
नूर से मामूर हो, हर शय चमकने लगती है
नेकियां बढ़ाता है, और बदी मिटाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

चल रहा है यह महीना पाकी-ओ-अज़मत भरा
वाह क्या कहने हैं इसके, नेमत-ओ-इबरत भरा
दूरियां मिटाता रब से, क़ुरबतें बढ़ाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

तेरा आगे हाथ फैलाता है ’शमसी’ ऐ ख़ुदा
अपनी रहमत के साए से इसको ना करना जुदा
यह हर साल आता है, यादें छोड़ जाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है

रहमतें ये लाता है, बरकतें ये लाता है
शान इसकी क्या कहूं, रमज़ान जब भी आता है ।
---मुईन शमसी
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( To listen the following "kalaam-e-Ramzaan, visit:
http://www.box.net/shared/kzfzrpu9r3u008zkt2k0 )


REHMATEN YEH LAATAA HAI, BARKATEN YEH LAATAA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

CHAAR-SU ALLAAH KI REHMAT BARASNE LAGTI HAI
NOOR SE MAAMOOR HO HAR SHAY CHAMAKNE LAGTI HAI
NEKIYAAN BADHAATA HAI, AUR BADI MITAATA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

CHAL RAHAA HAI YEH MAHEENA PAAKI-O-AZMAT BHARAA
WAAH KYA KEHNE HAIN ISKE, NEMAT-O-IBRAT BHARAA
DOORIYAAN MITAATA RAB SE QURBATEN BADHATA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

TERE AAGE HAATH PHAILAATA HAI 'SHAMSI' AIY KHUDA
APNI REHMAT KE SAAYE SE ISKO NA KARNA JUDA
YEH HAR SAAL AATA HAI, YAADEN CHHOD JATA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI

REHMATEN YEH LAATAA HAI, BARKATEN YEH LAATAA HAI
SHAAN ISKI KYA KAHU RAMZAAN JAB BHI AATAA HAI.
---Moin Shamsi

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

रमज़ान आ गया (RAMZAAN AA GAYAA) [All rights are reserved]

( To listen this kalaam-e-Ramzaan, visit: http://www.box.net/files#/files/0/f/0/1/f_847520109 )

( इस कलाम-ए-रमज़ान को सुनने के लिये इस लिंक पर तशरीफ़ लाएं: http://www.box.net/files#/files/0/f/0/1/f_847520109 )

RAMZAAN AA GAYAA SUNO RAMZAAN AA GAYAA,

BAARAH MAHEENO KA HAI YE SULTAAN AA GAYAA.

HAR SHAKHS TILAAWAT-O-TARAAWEEH ME HAI MASROOF,

ALLAH KE GHAR HAR EK MUSALMAAN AA GAYAA.

BEHKA SAKEGA NA KISI MOMIN KO IN DINO,

AB EK MAAH KI QAID ME SHAITAAN AA GAYAA.

AHKAAM-E-ILAAHI SABHI DUNIYA KO SUNAANE,

IS MAAHE MUQADDAS ME YE QUR-AAN AA GAYAA.

HAASIL KARO DARJE, KARO KASRAT SE IBAADAT,

HAR GHAR ME YE ALLAH KA FARMAAN AA GAYAA.

JAB TAK RAHEGA GHAR MERE BARKAT BADHAAYEGA,

MAAHE SIYAAM BAN KE WO MEHMAAN AA GAYAA.

GHAAFIL THA JO EEMAAN SE, MUDDAT SE WO DEKHO,

AAJ HAQ KI RAAH ‘SHAMSI’-E-NAADAAN AA GAYAA.

रमज़ान आ गया, सुनो, रमज़ान आ गया

बारह महीनों का है यह, सुल्तान, आ गया

हर शख़्स तिलावत-ओ-तरावीह में है मसरूफ़

अल्लाह के घर हर-एक मुसलमान आ गया

बहका सकेगा ना किसी मोमिन को इन दिनों

अब एक माह की क़ैद में शैतान आ गया

अहकाम-ए-इलाही सभी दुनिया को सुनाने

इस माह-ए-मुक़द्दस में यह क़ुर-आन आ गया

हासिल करो दर्जे करो, कसरत से इबादत

हर घर में यह अल्लाह का फ़रमान आ गया

जब तक रहेगा घर मेरे, बरकत बढ़ाएगा

माह-ए-सियाम बन के वो मेहमान आ गया

ग़ाफ़िल था जो ईमान से, मुद्दत से, वो देखो

आज हक़ की राह ’शमसी’-ए-नादान आ गया ।


मुबारक हो सबको (ALL RIGHTS RESERVED)

मुबारक हो सबको है रमज़ान आया MUBAARAK HO SABKO, HAI RAMZAAN AAYA
हज़ारों तरह की ये नेमतें लाया HAZAARO TARAH KI YE NEMATEN LAAYAA
आया रमज़ान आया, रमज़ान आया AAYA RAMZAAN AAYA, RAMZAAN AAYA

ये रोज़ों के दिन हैं तरावीह की रातें YE ROZON KE DIN HAIN TARAAWEEH KI RAATEN
जगाने को सहरी में आतीं जमातें JAGAANE KO SEHRI MEN AATEEN JAMAATEN
निकलती हैं घर-घर से इतनी ज़कातें NIKALTI HAIN GHAR-GHAR SE ITNI ZAKAATEN
कि हक़दार ख़ाली कोई रह न पाया KI HAQADAAR KHAALI KOI REH NA PAAYA
सभी ने मुक़द्दर में जो था वो पाया SABHI NE MUQADDAR MEN JO THA WO PAAYA
आया रमज़ान आया, रमज़ान आया AAYA RAMZAAN AAYA, RAMZAAN AAYA

करो ख़ूब कसरत से बस तुम इबादत KARO KHOOB KASRAT SE BAS TUM IBAADAT
नमाज़ें पढ़ो और करो तुम तिलावत NAMAAZEN PADHO AUR KARO TUM TILAAWAT
करो नेकियां याद रक्खो क़यामत KARO NEKIYAAN YAAD RAKKHO QAYAAMAT
ख़ुदा ने हमें इसलिये ही बनाया KHUDA NE HAMEN ISLIYE HI BANAAYA
यही तो बताने है क़ुरआन आया YAHI TO BATAANE HAI QUR'AAN AAYA
आया रमज़ान आया, रमज़ान आया AAYA RAMZAAN AAYA, RAMZAAN AAYA

यह अफ़्तार का वक़्त कितना हसीं है YEH AFTAAR KA WAQT KITNA HASEEN HAI
सभी रोज़ेदारों की महफ़िल जमी है SABHI ROZADAARON KI MEHFIL JAMI HAI
सुबह से हैं भूके, शिकन इक नहीं है SUBAH SE HAIN BHOOKE SHIKAN IK NAHI HAI
हैं चेहरों पे इनके बड़ा नूर छाया HAI CHEHRON PE INKE BADAA NOOR CHHAAYA
ख़ुदा ने सभी को है साबिर बनाया KHUDA NE SABHI KO HAI SAABIR BANAAYA
आया रमज़ान आया रमज़ान आया । AAYA RAMZAAN AAYA, RAMZAAN AAYA.
---मुईन शमसी ---MOIN SHAMSI
( इस कलाम-ए-रमज़ान को मेरी आवाज़ में सुनने के लिये इस लिंक पर आइये :
http://www.esnips.com/doc/2679ac41-ee91-4ee7-b730-0912642abaf2/001-mubarak )

( To hear this KALAAM-E-RAMZAAN in my voice, visit this link:
http://www.esnips.com/doc/2679ac41-ee91-4ee7-b730-0912642abaf2/001-mubarak )