रविवार, 23 जनवरी 2011

देशभक्ति-ग़ज़ल (All rights reserved)

( मेरी इस देशभक्ति-ग़ज़ल को मेरी आवाज़ में सुनने के लिये इस लिंक को कॉपी-पेस्ट कीजिये:

http://www.esnips.com/doc/9ea79888-3683-43f6-bd18-15a51e837afd/hindi-deshbhakti-ghazal-DESH-KE-JAN-JAN-SE )


देश के कण-कण से और जन-जन से मुझको प्यार है
देश-सेवा के लिये तन-मन सदा तैयार है ।


ईद दीवाली बड़ा-दिन होली और गुरु का परब
याँ बड़े सौहार्द से मनता हर-इक त्योहार है ।


अपने भारत में नहीं है कोई प्रतिभा की कमी
तथ्य ये स्वीकारता सम्पूर्ण ही संसार है ।


हिंद में लेकर जनम जो हिंद की खोदे जड़ें
ऐसे लम्पट-धूर्त पे सौ-सौ दफ़ा धिक्कार है ।


करके भ्रष्टाचार जो जेबों को अपनी भर रहा
देश का दुश्मन है वो सबसे बड़ा ग़द्दार है ।


इक तरफ़ उपलब्ध रोटी है नहीं दो-जून की
इक तरफ़ बर्बाद होता अन्न का भण्डार है ।


आज ’शमसी’ है किसे चिंता यहां कर्तव्य की
जिसको देखो, मुंह उठाए मांगता अधिकार है ।

बुधवार, 5 जनवरी 2011

ग़ज़ल: मादर-ए-वतन (All rights are reserved)

हिन्दू है जिसका जिस्म, मुसलमान जान है
वो मादर-ए-वतन मेरी, जग में महान है ।

परचम में तीन रंग हैं तीनों बड़े अहम
लहरा रहा है देखिये क्या इसकी शान है !

घुलती है शाम-ओ-सुब्ह कोई मिसरी सी कान में
बजती हैं घंटियां कहीं होती अज़ान है ।

रक्षा को अपने हिन्द की सीमा पे सब खड़े
कोई है शेर सिंह कोई शेर ख़ान है ।

माटी से अपने देश की सोना निकालता
भारत की जग में शान बढ़ाता किसान है ।

अपने वतन से प्यार करो उसके हो रहो
कहते यही हैं वेद यह कहता क़ुरान है ।

जाना है जिसको जाए वो अमरीका-ओ-दुबई
’शमसी’ को तो अज़ीज़ यह हिंदोस्तान है ।
---Moin Shamsi

( You can hear this ghazal by copy-pasting this link: