सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

ग़ज़ल : लो आज फिर (सर्वाधिकार सुरक्षित)


Note: This ghazal has been published in the Hindi weekly magazine INDIA NEWS (21.10.2011) : 

लो आज फिर मुझे उनका ख़याल आया है 
हज़ार हसरतें लेकर यह साल आया है 

हर-एक फूल के चेहरे पे नूर है रक़्सां 
हर-इक कली पे भी रंग-ए-जमाल आया है 

है चार-सिम्त ही जोशो-ख़रोश का आलम 
पयाम ईद का लेकर हिलाल आया है 

फिर आज घर में वो किलकारियां-सी गूंजे हैं 
फिर आज घर में कोई नौनिहाल आया है 

हर-इक सुबह की हुई शाम, दिन की रात हुई 
हर-इक उरूज को इक दिन ज़वाल आया है 

लबों से जिनके हमेशा ही गुल बरसते थे 
ज़बां पे उनकी ये क्यूं इश्तिआल आया है 

यह किस की याद में करते हो शायरी ’शमसी’ 
निगाह झुक गई जब यह सवाल आया है । 
---मुईन शमसी 

शब्दार्थ: हसरतें=इच्छाएं, नूर=चमक, रक़्सां=नाच रहा, रंग-ए-जमाल=सौन्दर्य का रंग, सिम्त=ओर/दिशा, जोशो-ख़रोश=उत्साह, पयाम=संदेश, हिलाल=चांद, नौनिहाल=नन्हा शिशु, उरूज=उदय, ज़वाल=अस्त, इश्तिआल=उग्रता/भड़कना/ग़ुस्सा ।

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Ghazal : Lo aaj phir (All rights are reserved) 

Lo aaj phir mujhe unka khayal aya hai 
hazaar hasrateN lekar ye saal aya hai 


har-ek phool ke chehre pe noor hai raqsaaN 
har-ik kali pe bhi rang-e-jamaal aya hai 


hai chaar-simt hi josh-o-kharosh ka aalam 
payaam eid ka lekar hilaal aya hai 


phir aaj ghar me wo kilkaariyaaN-si gooNje hain 
phir aaj ghar me koi naunihaal aya hai 


har-ik subah ki hui shaam, din ki raat hui 
har-ik urooj ko ik din zawaal aya hai 

laboN se jinke hamesha hi gul baraste the 
zabaaN pe unki ye kyu ishtiaal aya hai 

ye kis ki yaad me karte ho shaayari 'shamsi' 
nigaah jhuk gayi jab ye sawaal aya hai. 
---Moin Shamsi 

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