गुरुवार, 18 अगस्त 2011

मुहम्मद(स.) के दर पे (सर्वाधिकार सुरक्षित) Muhammad(SAWS) ke dar pe (All rights are reserved)

(तर्ज़ : सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं)

मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे
वहां जा के अब चैन हम पाएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे

वो दर है ऐसा जहां जा के हम को
मिलेंगी ख़ुशियां भुला देंगे ग़म को
दर-ए-अक़दस की जो जाली है चूम कर आएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे

दर-ए-मुहम्मद(स.) से कोई सवाली
न लौटा अब तक लिये हाथ ख़ाली
मुरादें दिल में हमारे जो हैं वो हम पाएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे

कि लौट कर आएंगे जब वहां से
दिल में होंगी मदीने की यादें
उन्हीं यादों के सहारे ये ज़िन्दगी बिताएंगे
मुहम्मद(स.) के दर पे चले जाएंगे ।
---मुईन शमसी

( इस कलाम को इस लिंक पर विद म्यूज़िक सुना जा सकता है :
http://www.esnips.com/doc/ef9567d7-cc27-491d-8514-de879812de39/005-muhammad-ke )

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(Tarz : Suhana safar aur ye mausam haseeN)


Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge
wahaaN jaa ke ab chain ham paaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge

wo dar hai aisa jahaaN jaa ke ham ko
milengi khushiyaaN bhula denge gham ko
dar-e-aqdas ki jo jaali hai choom kar aaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge

dar-e-Muhammad(SAWS) se koi sawali
na lauta ab tak liye haath khaali
muraadeN dil meN hamaare jo haiN wo ham paaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge

ki laut kar aaenge jab wahaaN se
dil meN hongi madeene ki yaadeN
unheeN yaadoN ke sahaare ye zindagi bitaaenge
Muhammad(SAWS) ke dar pe chale jaaenge.
---MOIN SHAMSI

[ Audio (with music) of this kalaam is available at the following link :
http://www.esnips.com/doc/ef9567d7-cc27-491d-8514-de879812de39/005-muhammad-ke ]

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