सोमवार, 29 अगस्त 2011

Alvida maah-e-mubaarak (All rights are reserved) अलविदा माह-ए-मुबारक (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Alvida maah-e-mubaarak, tujh ko kehte alvida
phir milenge tujh se gar chaha khuda ne, alvida

tu jo aya sang laya nematen aur barkaten
ja raha hai chhod kar tu yad apni, alvida

theen tere dam se har ik momin ke ghar me raunaqen
masjido me rozadaaro ki thi mehfil, alvida

farzo sunnat aur nawafil, sab ki theen pabandiyan
sehri-o-aftar ka dilkash nazara, alvida

hai dua 'shamsi' ki, ya Rab ! josh ye qaayam rahe
deen ke taabe rahen ham baaraho maah, alvida.
---Moin Shamsi

( To hear this kalaam, visit: http://www.box.net/shared/94qqa1s8r4kfcra4genj )
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अलविदा माह-ए-मुबारक, तुझको कहते अलविदा
फिर मिलेंगे तुझ से गर चाहा ख़ुदा ने, अलविदा

तू जो आया संग लाया नेमतें और बरकतें
जा रहा है छोड़ कर तू याद अपनी, अलविदा

थीं तेरे दम से हर इक मोमिन के घर में रौनक़ें
मस्जिदों में रोज़ादारों की थी महफ़िल, अलविदा

फ़र्ज़ो-सुन्नत और नवाफ़िल, सब की थीं पाबन्दियां
सहरी और अफ़्तार का दिलकश नज़ारा, अलविदा

है दुआ ’शमसी’ की, या रब ! जोश ये क़ायम रहे
दीन के ताबे रहें हम बारहों माह, अलविदा ।
---मुईन शमसी

( इस कलाम को सुनने के लिये इस लिंक पर तशरीफ़ ले जाएं :
http://www.box.net/shared/94qqa1s8r4kfcra4genj )

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