रविवार, 23 जनवरी 2011

देशभक्ति-ग़ज़ल (All rights reserved)

( मेरी इस देशभक्ति-ग़ज़ल को मेरी आवाज़ में सुनने के लिये इस लिंक को कॉपी-पेस्ट कीजिये:

http://www.esnips.com/doc/9ea79888-3683-43f6-bd18-15a51e837afd/hindi-deshbhakti-ghazal-DESH-KE-JAN-JAN-SE )


देश के कण-कण से और जन-जन से मुझको प्यार है
देश-सेवा के लिये तन-मन सदा तैयार है ।


ईद दीवाली बड़ा-दिन होली और गुरु का परब
याँ बड़े सौहार्द से मनता हर-इक त्योहार है ।


अपने भारत में नहीं है कोई प्रतिभा की कमी
तथ्य ये स्वीकारता सम्पूर्ण ही संसार है ।


हिंद में लेकर जनम जो हिंद की खोदे जड़ें
ऐसे लम्पट-धूर्त पे सौ-सौ दफ़ा धिक्कार है ।


करके भ्रष्टाचार जो जेबों को अपनी भर रहा
देश का दुश्मन है वो सबसे बड़ा ग़द्दार है ।


इक तरफ़ उपलब्ध रोटी है नहीं दो-जून की
इक तरफ़ बर्बाद होता अन्न का भण्डार है ।


आज ’शमसी’ है किसे चिंता यहां कर्तव्य की
जिसको देखो, मुंह उठाए मांगता अधिकार है ।

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