मंगलवार, 28 सितंबर 2010

बाल-कविता

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,
आपस में सब भाई-भाई ।


बहकावे में आ जाते हैं,
हम में है बस यही बुराई ।


अब नहीं बहकेंगे हम भईया,
हम ने है ये क़सम उठाई ।


मिलजुल कर हम सदा रहेंगे,
हमें नहीं करनी है लड़ाई ।


देश करेगा ख़ूब तरक़्क़ी,
हर घर से आवाज़ ये आई ।

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